जहां चाह, वहां राह
कहावत बेशक पुरानी, दिखाती है कामयाबी की नई कहानी
बदलाव की राह में चुनौतियां और मुसीबतें आती ही हैं। ज्यादातर लोग इनके सामने ठहर जाते हैं, लेकिन डॉ. पवन कुमार मिश्रा संघर्ष और सफलता की एक मिसाल हैं।
PhD से उद्यमिता की राह तक
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ से पीएचडी पूरी कर डॉ. पवन एडहॉक टीचर के रूप में पढ़ाने लगे। यहां पढ़ाते हुए ही अपनी ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने का ख्याल आया। लेकिन अपने उद्यम को शुरू करने की कोई योजना और पूंजी उनके पास नहीं थी।
यूथ अड्डा से मिला सहयोग
सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान की जानकारी होते ही, डॉ. पवन यूपीकॉन के लखनऊ स्थित यूथ अड्डा पर पहुंचे। यहां कंसल्टेंट व ट्रेनर्स ने बिजनेस प्लानिंग, सरकारी स्कीम्स और लोन सपोर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ट्रेनिंग सर्टिफिकेशन प्रोग्राम पूरा करने के बाद डॉ. पवन को 2.5 लाख रुपए लोन पास हुआ। यह चेक खुद सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों मिला।
कोचिंग से बनाई नई पहचान
डॉ. पवन ने 1 से 10वीं क्लास के बच्चों की ऑफलाइन कोचिंग शुरू कर दी है। इस मुहिम में उनकी पत्नी डॉ. नीलम गौतम (लखनऊ यूनिवर्सिटी से पीएचडी) भी पूरा सहयोग कर रही हैं।
अपने उद्यम की इस कामयाबी के लिए मैं उत्तर प्रदेश सरकार की सीएम युवा योजना और यूपीकॉन से हर कदम पर मिले सहयोग को धन्यवाद देता हूं। जिन्होंने मुझ जैसे सैंकड़ों नए उद्यमियों के सपनों को साकार करने में इतना योगदान दिया है।— डॉ. पवन कुमार मिश्रा, उद्यमी