पिता के स्वरोजगार को ही बनाया अपने सफल स्टार्टअप की बुनियाद
नींव मज़बूत हो तो इमारत भी टिकाऊ होती है
कासगंज जनपद के मोहल्ला जय जय राम निवासी 26 साल के किशोर वार्ष्णेय यह बात बखूबी जानते थे — यह सीख उन्हें किसी किताब से नहीं बल्कि अपने पिता श्री गिरीश चंद्र की जिंदगी के संघर्षों से मिली थी।
किशोर के पिता पेपर और पत्ते के बने दोने बेचने के स्वरोजगार से जुड़े थे। पिता को देखते हुए ही किशोर भी हमेशा से अपना बिजनेस शुरू करने का सपना देखते थे। लेकिन पिता की उम्र, स्वास्थ्य और कमजोर होती आर्थिक स्थिति ने किशोर को लंबे समय तक रोके रखा।
जिला उद्योग केंद्र से मिली उम्मीद
कासगंज जिला उद्योग केंद्र से किशोर को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) योजना के बारे में बताया गया। यूपीकॉन के विशेषज्ञों ने बैंक से लोन आवेदन से लेकर बिजनेस शुरू करने की हर प्रक्रिया की जानकारी दी।
किशोर कहते हैं, "पूरे कासगंज जिले से सीएम युवा के लिए पहला आवेदन मेरा ही था। जिला उद्योग केंद्र, यूपीकॉन और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों ने हर तरह से मेरी मदद की।"
4 लाख के लोन से बनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
बैंक से किशोर का 4 लाख रुपए का लोन मंजूर हुआ। इस रकम से दोना-पत्तल बनाने की मशीन खरीदकर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट शुरू की। पिता के अनुभव को ही स्टार्टअप की बुनियाद बनाया — यह फैसला बेहद फायदेमंद साबित हुआ।
आज — बढ़ता व्यवसाय, नई पहचान
मौजूदा समय में किशोर का व्यवसाय लगातार ग्रोथ कर रहा है। यूनिट में 5 लोग काम कर रहे हैं और सोशल मीडिया मार्केटिंग से काफी ऑर्डर ऑनलाइन भी मिलने लगे हैं।
अगर यूपी गवर्नमेंट की यह योजना न होती तो मुझे प्राइवेट से लोन लेना पड़ता। सरकारी या प्राइवेट नौकरी के भरोसे बैठने से बेहतर है कि युवाओं को स्वरोजगार के लिए कदम बढ़ाने चाहिए। मैंने भी एक कदम बढ़ाया और मुझे हर जगह से ताकत मिलती रही।— किशोर वार्ष्णेय, सीएम युवा उद्यमी